आज के आधुनिक क्रिकेट में एक मिलीमीटर का अंतर भी हार और जीत तय कर सकता है। वे दिन अब बीत गए जब एक अंपायर का "अनुमान" ही अंतिम फैसला होता था। आज, उस निर्णय की जिम्मेदारी हॉक-आई (Hawk-Eye) पर है—एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक जिसने क्रिकेट को निष्पक्ष और पारदर्शी बना दिया है।
2001 में अपनी शुरुआत से लेकर आज के बड़े Cricket Tournaments (जैसे IPL और वर्ल्ड कप) तक, हॉक-आई खेल का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।
क्रिकेट हमेशा से बारीकियों का खेल रहा है, जहाँ एक छोटा सा फैसला मैच का रुख बदल सकता है। लेकिन डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) के आने के बाद से खेल में ऐसा बदलाव आया है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ। इस क्रांतिकारी तकनीक ने न सिर्फ अंपायरिंग गलतियों को कम किया है बल्कि खेल में एक नई रणनीतिक गहराई भी जोड़ दी है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे DRS ने क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल दिया और इसका खिलाड़ियों, टीमों और फैन्स पर क्या असर पड़ा।